Pages

Sunday, 28 April 2013

तुकडे आणि कविता

---------------------------------------------------------------------------


सभ्य असभ्यतेच्या मर्यादा ओलांडून

घुटमळत राहते एक मांजर तुझ्या पायाशी
शकुन अपशकुनाचे दोष
पचवत राहते एक मांजर माझ्या उराशी
अभिमान स्वाभिमान
नैतिकता अनैतिकता
निष्ठा श्रेष्ठा
गोँजारत राहते
या मांजराला

मांजराला काहीच कळत नाही
घुटमळत राहते तुझ्या पायाशी
मांजराला कळते सारेच
कवटाळत राहते मला ह्रुदयाशी

---------------------------------------------------------------------------

मुळातुनच चिडत जायच
मुळातुनच तुटत जायच
मुळासहित मुळासकट
नात्याच्या मातीवर
नात्याचे आकाश
नात्याच्या क्षितिजावर
पुन्हा जन्म घेत रहायचे
खोडासहित खोडासकट
पान पान उलटत रहायचे
झाड निष्पर्ण होईपर्यँत
मुळातुनच चिडायच
मुळातुनच तुटायच
मुळासहित मुळासकट

--------------------------------------------------------------------

डोळाभरून येते पाणी 
अंगाई कुणी गात नाही 
आशीर्वाद देते वेदना 
हाक कुणी गोंजारत नाही 
पालथे पडते उभे आयुष्य 
ओलांडत नाही लक्ष्मणरेघ 
आणि जीव होत जातो 
उदास एकटा संन्यासी 

--------------------------------------------------------------------------

दरवेळी हसायच दरवेळी हसायच
आपण नाही कुणी कुणाचे
समजुतीचे वाक्य रिवांईड फॉरवर्ड
एका हातात ठेवायचा निखारा
एका हातात ठेवायचे फुल
दरवेळी हसायच दरवेळी हसायच
कधी ओठांनी कधी डोळ्यांनी
हसायच फक्त 
कारण
आपण नाही कुणी कुणाचे


---------------------------------------------------------

कविता 

No comments:

Post a Comment