कविता एक आर्तता
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Tuesday, 27 November 2012
अज्ञात झरे
अज्ञात झरे
शब्द बहिरे बहिरे
शब्द भाबडे भोळे
ओठावर फुल तुझ्या
कानातले डुल झुले
शब्द आंधळे आंधळे
शब्द गहिरे कापरे
स्पर्शात तुझ्या अंगार
श्वासाचे अज्ञात झरे
----कविता
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